माँ री घर कितनी दूर है बतादे नैं – Poetry by Sanjeet Saroha

संजीत सरोहा हरियाणा राज्य के वह कलाकार हैं जो अपनी कविताओं के माध्यम से कट्टर इंसान को भी रुला सकते हैं आज हम आपके सामने संजीत सरोहा जी की एक कविता पेश कर रहे हैं जिसका टाइटल है “माँ री घर कितनी दूर है बतादे नैं

इस कविता में संजीत सरोहा जी हमारे बड़े शहरों से निकलकर जाने वाले श्रमिकों का दुख दिखा रहे हैं यह कविता इतनी गहरी है की किसी भी इंसान को रुला सकती है क्योंकि कोरोनावायरस की वजह से भारत के हालात ही कुछ ऐसे हो गए हैं कि बड़े शहरों से श्रमिक अपने राज्यों के लिए पैदल ही निकल पड़े हैं इस कविता में उन्हीं श्रमिकों का दुख दिखाया गया है कि किस तरह से एक छोटा सा बच्चा अपनी मां से पूछता है कि घर कितनी दूर है और आप मुझे खाने के नाम पर सिर्फ पानी ही क्यों पिला रही है तो आइए दोस्तों कविता को पूरा पढ़ते हैं,

Sanjeet Saroha New Poem

किसे टर्क टमपु गाड़ी आले नें हाथ दिखादे नैं
सूटकेस पै तै भाई नै तार के मने बिठादे नैं
रोड पै तपदा चालदा भरी दोपहरी एक बालक बोल्या
माँ रि घर कितनी दूर रहज्ञा बतादे नैं,

जब भी किमे मांगु तने पाणि पियाया है
देख रि माँ काल का मने कुछ नहीं खाया है
माँ रि टांग दुखे हैं हालया नहीं जाँदा
थक लिया बहुत इब चालया नहीं जाँदा
एक काँधे बेबे है एक पै मने बिठादे नैं
रोड पै तपदा चालदा भरी दोपहरी एक बालक बोल्या
माँ रि घर कितनी दूर रहज्ञा बतादे नैं,

एक आदमी के कंधे धरया पड़ा है
आ रि माँ वो किसका टाबर मरा पड़ा है
देख तो मेरे जितनी उम्र का है वीचारा
तने बेरा कोण है इसका हत्यारा
चल छोड़ तू मेरे इन पाया के छाले हटादे नैं
रोड पै तपदा चालदा भरी दोपहरी एक बालक बोल्या
माँ रि घर कितनी दूर रहज्ञा बतादे नैं,

जानूँ हूँ आड़े ती कितनी मुसकिल तै ल्ययी तू
10 घंटे पहलया रोड पै मेरे बाबू नें पड़ा छोड़ आयी तू
माँ रि एक बात बता सारा काम करया करदे फेर भी क्यूँ बाढ़ दिए
इन शहर आल्या नें आपने बनाओडे घर तै आपी काढ़ दिए
जान नहीं रहरि गात मैं घेटि के गूठा लादे निं
रोड पै तपदा चालदा भरी दोपहरी एक बालक बोल्या
माँ रि घर कितनी दूर रहज्ञा बतादे नैं,

ये Police आले क्यूँ डंडे गेल बाढ़े हैं
आपा के मुसलमान हाँ जो आपा नें ये काढ़े हैं
टर्क नें कुचल दिए सारे रोड के रोड भरे पड़े
देख रि माँ आपने बरगे बेग आले कितने मरे पड़े
गढ़ गढ़ करदी जाण लाग रही मने वा रेल दिखादे नैं
रोड पै तपदा चालदा भरी दोपहरी एक बालक बोल्या
माँ रि घर कितनी दूर रहज्ञा बतादे नैं,

पकड़ के माँ का हाथ ख़ाली सी जगह देख के बैठ गया
आधी रात नें थक के छोरा माँ गेल ओडे लेट गया
गात के एक एक अंग नें न्यारा न्यारा छाँट गी
मानसा नें ढ़ोण आली आज मानस खानी उन्ने काट गी
किसा होवे है नर्क स्वर्ग तोली सी दिखादे नैं
आसमान मैं मा की आंगली पकड़े यमराज गेल चालदा एक बालक बोल्या
माँ की भगवान कितनी दूर रहगया बतादे नैं,

Sanjeet Saroha Video

Leave a Comment

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!